पुष्पा कॉन्वेंट हाई स्कूल एक क्रिश्चियन कैथोलिक माइनॉरिटी संस्था है जिसकी स्थापना 1993 में संत पुष्पा के पथ प्रदर्शन से हुई। यह संस्था एक धार्मिक समूह के व्यक्तियों द्वारा प्रशासित एवं व्यवस्थित हैं। इस संस्था में शामिल सभी व्यक्ति एक सहायतार्थ संस्था C.T.C. द्वारा जुड़े हुये हैं । जो कि शिक्षा चिकित्सा और सामाजिक कार्यों में सहभागी हैं। यह संस्था Registration of Societies Act No. XXI 1860 के अंतर्गत रजिस्टर्ड हैं। यह संस्था एक सरकारी सहायता रहित सह शिक्षा संस्था है जहां बालक, बालिकाओं की शिक्षा के साथ उनका शारीरिक और मानसिक विकास एक स्वस्थ वातावरण में होता है ताकि वे राष्ट्र के एक अच्छे नागरिक बन सकें इस संस्था का माध्यम हिंदी हैं। परंतु अंग्रेजी की शिक्षा कक्षा K.G. से अनिवार्य रूप से प्रदान की जाती हैं। पर्यावरण ======== एक अच्छा वातावरण प्रदान करने के लिए हमारी शैक्षिक संस्था बच्चों को बौद्धिक जानकारी, आत्मिक प्रेरणा, भावनात्मक संतुलन, नैतिक और सामाजिक समर्पण की उचित शिक्षा प्रदान करती हैं लक्ष्य ====== इस संस्था का उद्देश्य हैं कि छात्र-छात्राऐं एक ऐसी समाज का निर्माण करें जहां हर किसी को एक स्वतंत्र और परिपूर्णता का जीवन मिल सके जो जीवन की अज्ञानता की जंजीरों से मुक्त हो लोगों को एक ऐसा समय देना हैं हमारी संस्था का मुख्य उद्देश जहां लोग उत्पीड़न दबाव से मुक्त हो और समाज में एक दूसरे के प्रति बिना किसी द्वेष, ईर्ष्या के समाज में रहें तथा हमेशा समाज की भलाई के बारे में कार्य करें क्योंकि हम सभी एक ही अभिभावक परमपिता ईश्वर हैं। शैक्षिण उद्देश्य =========== 1. एक व्यक्ति का सर्वांगीण विकास, स्वस्थ मानसिकता, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास हो। 2. स्वस्थ समाज का निर्माण करना साथ समाज को शिक्षित करना । 3. इच्छाशक्ति को मजबूती देना जिससे छात्र/छात्राएं व्यक्तिगत गुण का अभ्यास करें तथा बुराइयों को हटाए। 4. इंसान के ह्रदय को विकसित करना ताकि छात्र-छात्राएं सभी से प्रेम कर सकें। 5. हमारी प्राचीन सभ्यता की प्रेरणा छात्र-छात्राओं को देना हैं। 6. महत्वाकांक्षा को प्रेरित करना। 7. उच्च शैक्षिक एवं सामाजिक स्तर को बनाए रखना। 8. छात्र/छात्राओं को अपने बहुमूल्य समय व सनातनत्व के लिए प्रशिक्षित करना। 9. छात्र/छात्राओं में दैव्य शक्ति की शिक्षा देना जिससे वे आधुनिक बुराइयों जैसे नशा आदि दूषित राजनीति, लालच, बेईमानी से अपने को बचा कर रखें तथा समाज को भी इससे बचाने का प्रयास करें।